रविवार, 30 नवंबर 2014

साला मैं तो साहब बन गया

साला मैं तो साहब बन गया

रामदीन आज का ताजा अखबार लेकर मेरे पास आया और बोला- बाबू साहब, जरा देखो तो आज गरीब लोगन के लिए कोई खास समाचार छपा है क्या! हमने मोहल्ले वाले थड़ी पर एक बाबूजी से चाय पीते सुना है कि अफसर तो गए बिना भाव के, सरकार ने नए साल से हरेक आदमी को अफसर बनाने का पिलान बनाया है।उसने बताया कि रामदीने, अब तो तू भी अफसर हो गया है रे। उसने पूरी बात नहीं बताई, कुछ मुझे भी दफ्तर आने की जल्दी थी।उसकी बात मेरे समझ में नहीं आई। उसने इतना तो बताया था कि अब नए साल से किसी भी पहचान पत्र या जरूरी दस्तावेज़ सत्यापन के लिए किसी साहब के पास जाने की जरूरत नहीं, बल्कि हम ही उन पर अपने दस्तखत कर तस्दीक कर सकेंगे। क्या यह बात अखबार में छपी है?
अब हम उसकी बात समझे और बोले– हां रामदीन किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते समय या राशन कार्ड,जन्म अथवा जाति प्रमाण-पत्र बनवाने या बिजली-पानी कनेक्सन लेने के लिए अथवा किसी कम के लिए अर्जी के साथ जो भी डाक्यूमेंट लगेंगे उन्हें किसी गजेटेड आफिसर से तस्दीक कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, अब तुम खुद ही अपने कागज तस्दीक कर सकते हो।
बाबू साहब,इसका मतलब अब हम खुद ही अफसर बन गये हैं।हमारी मुहर भी चलेगी!यह तो वही हुआ ना कि साला मैं तो साब बन गया।क्या बताएं बाबू साहब, हमने अपने दस्तावेजों के तस्दीक के लिए जीवन में कितने कष्ट उठाए हैं। हमारे अपने साहब भी हर पेपर के दस रुपये के हिसाब से पैसे वसूलते थे और यह अहसान जताते थे कि तुम्हारा इतना बड़ा काम किया जो कोई नहीं कर सकता। हमने कागजों की तस्दीक के लिए घंटों इंतजार किया है साहब। हमारे बच्चों ने ना जाने कितने साबों की दुतकारें झेली और बेगारें की हैं।काले कोट वालों ने भी हमें जमकर लूटा है साहब। कई लोगों ने तो इसे अपना धंधा ही बना लिया। अब उनका क्या होगा साहब!
हमने कहा- अब किसी मुहर की जरूरत नहीं। अलबत्ता, दस्तावेज़ झूठे साबित हो गए तो जुर्माने के साथ जेल भुगतनी पड़ सकती है।रामदीन पलटकर बोला-हमको काहे डराते हो साहब,हमें ठहरे सच्चे-सीधे लोग, सही कागज बनवाने में ही हमारा एड़ी से चोटी तक पसीना छूट जाता है, जूते घिस जाते हैं। ये काम तो बड़े लोगन ही कर सकते हैं जो धनबल और बाहुबल के बूते कानून को जेब में लिए घूमते हैं। उनको अंदर करो ना साहब,जिन्होंने आम लोगन का जीना हराम कर रखा है।
             
-फारूक आफरीदी

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