व्यंग्य/
बेट्री चार्ज करने का समय
आजकल हर
कोई अपनी बेट्री चार्ज करने में लगा है। लोकसभा और राज्य विधान सभा चुनावों में
कमल बेट्री ऐसी चार्ज हुई कि सारे ब्रांड ही ठप्प हो गए।समाजवादी बेट्री की समस्या
कुछ ज्यादा गहरी है।अब तक एक दूसरे की बेट्री को नाकारा साबित करने में लगी रही
क्षेत्रीय कंपनियों ने अब मिलकर एक सूत्री कार्यक्रम बनाया है कि किसी तरह कमल
बेट्री को डिस्चार्ज किया जाए। धंधे में ये सब कुछ चलता रहता है। समाजवादी बेट्री
के सीईओ मुलायम और लालू अपने भूले बिसरे गीतों की कड़ी को फिर से जोड़ने में जी-जान
से जुट गए हैं। वे समझते हैं कि शगुन और सम्बन्धों के नए रिश्ते-नाते बेट्री चार्ज
करने में मजबूत आधार साबित होंगे।शायद यह भी मान बैठे हैं कि इससे उनके पालिटिकल
मार्केट में अच्छा संदेश जाएगा।
इस समय
यूं तो राजनीतिक पटल पर कई बेट्रियां प्रचलित हैं लेकिन एक लंबे समय तक हाथ वाली
बेट्री का साम्राज्य रहा जिसे देश की जनता ने नकार दिया और मैनेजमेंट गुरु मोदी ने
पहला स्ट्रोक मारकर बाजी अपने पाले में कर ली। इसके साथ क्षेत्रीय स्तर पर पोपुलर
कई बेट्री कंपनियों को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ा है।इसका कारण भी साफ
है कि इनका मैनेजमेंट परिवार से ऊपर कभी सोचता ही नहीं था। तृणमूल को छोड़ दें तो
लगभग सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों की यही दशा रही, चाहे महाराष्ट्र,तेलंगाना, उत्तर प्रदेश,हरियाणा,जम्मू-कश्मीर, झारखंड आदि कोई भी राज्य क्यों ना हो।
राजनीति
का धंधा इतना गंदा है कि एक बार जब चौपट हो जाए तो फिर पांच साल तक आसानी से
संभलता नहीं और हाथ मलने के अलावा कोई काम नहीं रहता। हां, हाथ वाली कंपनी से लेकर क्षेत्रीय क्षत्रपों की कंपनियों ने कभी सपने में
भी नहीं सोचा होगा कि नया खिलाड़ी उनके धंधे का ऐसे भट्टा बैठाएगा कि उनको नानी याद
आ जाएगी। लेकिन होनी को कौन टाल सकता है।महाराष्ट्र की एक ‘शरद’ कंपनी ने तो ऐसी पलटी खाई कि दो भाइयों के फटे में टांग अड़ाकर जिंदगी भर
अपनी प्रतिद्वंद्वी रही कमल कंपनी से ही अप्रत्यक्ष हाथ मिला लिया और हाथ कंपनी को
धता बता दिया जिसके साथ सुख-दुख में हमेशा दाना-पानी का संबंध रहा। उधर दूसरी तरफ
रूठे हुए दोनों भाई जब एक हो गए तो शरद बेट्री की मिट्टी खराब हो गयी।
धंधा कोई
भी हो, पापड़ तो सबको बहुत बेलने पड़ते हैं। मुश्किल यह है कि पापड़ बेलने के लिए
चार साल का लंबा समय है। डर इस बात का है कि इस बीच कहीं ये ग्रुप आफ कंपनी बिखर नहीं जाए क्योंकि
जिंदा क़ौमें ज्यादा इंतजार नहीं करती। अभी ऐसी कोई बेट्री नहीं बनी जो बिना चले
चार साल डिस्चार्ज ना हो।
-फारूक
आफरीदी,
बी-70, ‘राज विला’, प्रगति पथ,बजाज नगर,
जयपुर-302015
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